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Wednesday, May 11, 2016

देश की पहली फुल सोलर ट्रेन चलने को तैयार

जोधपुर (सं.सू.)। रेलवे के जोधपुर वर्कशॉप ने देश की पहली फुल सोलर ट्रेन तैयार की है। इसमें लाइट-पंखे सोलर एनर्जी से चलेंगे। लेकिन इसका ट्रायल नहीं हो पा रहा है। वजह यह कि रेलवे को चिंता है कि पैसेंजर इसकी छत पर चढ़कर पैनल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

नॉर्थ-वेस्ट जोन के चीफ इंजीनियर बीएल पाटिल का कहना है कि इस ट्रेन को फिलहाल उस रूट में नहीं चलाया जा सकता है, जहां पैसेंजर छतों पर चढ़ते हों। इसके ट्रायल के लिए अभी अप्रूवल मिलना भी बाकी है। दरअसल, रेलवे बोर्ड ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत जोधपुर वर्कशॉप को 1.95 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट दिया है। इसके तहत सोलर पैनल वाले 50 कोच बनने हैं। शुरू में ऐसी ट्रेनों को दिन में ही चलाया जाएगा। बाद में सोलर एनर्जी को बैटरी में स्टोर कर शाम और रात में यूज करने की प्लानिंग पर काम होगा। जयपुर में इस तरह की 22 ट्रेनें तैयार होनी हैं।

आईआईटी बेंगलुरु ने सोलर पावर्ड ट्रेन से जुड़ी एक रिसर्च की। इसमें सामने आया कि अगर 20 कोच की ट्रेन एक साल में 188 फेरे लेती है, तो करीब 90 हजार लीटर डीजल खर्च होता है। सोलर पैनल से यह डीजल बचेगा। यानी साल में करीब 48 लाख रुपए से ज्यादा बचेंगे। पहली बार सोलर पैनल कोच का ट्रायल रेलवे ने जून 2015 में रेवाड़ी-सीतापुर पैसेंजर ट्रेन में किया था। हालांकि, ये ट्रायल केवल ट्रेन के एक नॉन एसी कोच पर हुआ था। इसमें हर पैनल को लगाने में 3.9 लाख रुपए खर्च हुए थे। इनसे रेलवे को हर साल 1.24 लाख रुपए का फायदा होने की संभावना जताई गई थी। पठानकोट-जोगिंदरनगर और कालका-शिमला सेक्शन की दो नैरोगेज ट्रेनों में भी ट्रायल बेसिस पर सोलर पैनल लगाए गए थे।