पटना (सं.सू.)। बिहार सरकार भले ही सुशासन का दंभ भरती हो और लोक शिकायत निवारण अधिनियम लागू करने तैयारी चल रही है। पर एक मां का दर्द सुनकर दावों और हक़ीक़त की पोल खुल जाएगी। सीता देवी जिसकी दो बेटियां बीते 9 महीने से गयाब है। दबंगों ने हथियार के बल पर दो सगी बहनों का अपहरण कर लिया और अब माता पिता को जान से मारने की धमकी दे रहें। पीड़ित महिला चार बार सीएम के जनता दरबार में गुहार लगा चुकी है।
सीता देवी के आंसू वैसे मां की है जो पिछले 9 महीनों से दो बेटियों के इन्तजार में है। सीता देवी की आंखे इन्तजार करते हुए पथरा गयी है। दबंगों ने सीता देवी के दो नाबालिग बेटियों को अगवा कर लिया गया है। घटना 21 अगस्त 2015 की है, जब दबंगों ने उन्हें अगवा कर लिया।
वे कहा हैं, किस हाल में है इस मां को नहीं मालूम। लगातार वो दर-दर की ठोकर खा रही है कभी पुलिस तो कभी मुख्यमंत्री के जनता दरबार में चार बार फ़रियाद लगा चुकी है, एक हजार बार थानों के चक्कर लगा चुकी है।
सीता देवी की माने तो ये मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर की रहने वाली है और बिहार भर में घूम-घूम कर अपनी दोनों बेटी व पति के साथ जीवन गुजर बसर करती थी। बात पिछले साल की है जब नवादा के वारसलिगंज में वो सुबेलाल यादव के यहां किराये में रहने लगी। जिसके बाद मकान मालिक समेत कुल चार लोगों ने रागनी और राजमणि को अगवा कर लिया। अब वे कहा हैं ये इन्हें नहीं मालूम लेकिन पुलिस के पास करीब एक हफ्ते तक जाने के बाद भी न तो महिला की एफआईआर हुई न कोई कर्रवाई।
सीता देवी अपनी बेटियों की तलाश में बाल कल्याण समिति पहुंची जिसके निर्देश पर मामला तो दर्ज़ हुआ लेकिन आरोपियों का नाम उसमें नहीं डाला गया। सीता कहती है कि सैकड़ों बार पुलिस के चक्कर लगाने के बाद नवादा के एसपी ने कह दिया कि वो कोई भगवान नहीं है जो पता कर के बता दें।
सीता अपनी दोनों बेटियो की तलाश में 4 बार मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी जा चुकी है लेकिन आज तक कोई नतीजा नहीं निकला दूसरी ओर जिनके ऊपर आरोप है वो इन्हें धमकी दे रहे हैं।
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के जनता दरबार में ये फरियाद लेकर आई जिसके बाद सुशील मोदी ने भी सरकार के सुशासन पर सवाल खड़े किये।
सीता देवी को दबंग लगातार केस वापस नहीं लेने की स्थिति में जान से मारने की धमकी दे रहें है। मुख्यमंत्री के गृह जिले की घटना हैं और चार बार सीएम के दरबार में दस्तक देने के बाद भी महिला न्याय के लिये दर-दर भटक रही है।
