विएना (सं.सू.)। NSG पर चीन, भारत की सदस्यता का विरोध करने वाले देशों की अगुआई कर रहा है। तुर्की, न्यूजीलैंड, आयरलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रिया चीनी रुख के साथ थे। ऐसे में कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद चीन को मनाने जाएंगे।
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए भारत के आवेदन पर विएना में हुई 42 सदस्य देशों की बैठक में कोई फैसला नहीं लिया जा सका।
अब दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में 20 जून को होने वाली बैठक में इस मामले पर चर्चा होने की उम्मीद है। इससे पहले अमरीकी समर्थन से मिले बल के बीच एनएसजी की सदस्यता के भारत के दावे को ज्यादातर सदस्य देशों से सकारात्मक संकेत मिले थे लेकिन चीन इसके विरोध पर अड़ा था।
यह भी कहा जा रहा है भारत अब एनएसजी मुद्दे पर चीन पर ज्यादा बयानबाजी नहीं करेगा। भारत को लग रहा है कि कहीं इससे चीन का मूड खराब न हो जाए। सूत्रों के मुताबिक, भारत नहीं चाहता कि चीन इस मामले में कोई सख्त कदम न उठा ले। इसके अलावा, अगर भारत शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन के लिए तय सीमा में जरूरी प्रॉसेस पूरी कर लेता है तो बैठक में पाक के साथ शामिल हो सकता है। सूत्रों की मानें तो मोदी के पास 23-24 जून को SCO की मीटिंग में हिस्सा लेने का मौका होगा। अगर मोदी चीन जाते हैं तो वे प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से पर्सनली मिलकर एनएसजी के मुद्दे पर लॉबिंग कर सकते हैं।
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए भारत के आवेदन पर विएना में हुई 42 सदस्य देशों की बैठक में कोई फैसला नहीं लिया जा सका।
अब दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में 20 जून को होने वाली बैठक में इस मामले पर चर्चा होने की उम्मीद है। इससे पहले अमरीकी समर्थन से मिले बल के बीच एनएसजी की सदस्यता के भारत के दावे को ज्यादातर सदस्य देशों से सकारात्मक संकेत मिले थे लेकिन चीन इसके विरोध पर अड़ा था।
यह भी कहा जा रहा है भारत अब एनएसजी मुद्दे पर चीन पर ज्यादा बयानबाजी नहीं करेगा। भारत को लग रहा है कि कहीं इससे चीन का मूड खराब न हो जाए। सूत्रों के मुताबिक, भारत नहीं चाहता कि चीन इस मामले में कोई सख्त कदम न उठा ले। इसके अलावा, अगर भारत शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन के लिए तय सीमा में जरूरी प्रॉसेस पूरी कर लेता है तो बैठक में पाक के साथ शामिल हो सकता है। सूत्रों की मानें तो मोदी के पास 23-24 जून को SCO की मीटिंग में हिस्सा लेने का मौका होगा। अगर मोदी चीन जाते हैं तो वे प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से पर्सनली मिलकर एनएसजी के मुद्दे पर लॉबिंग कर सकते हैं।

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