नई दिल्ली (सं.सू.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच दिनों की विदेश
यात्रा के बाद भारत वापस आ गए। उनका विमान शुक्रवार की सुबह नई दिल्ली
हवाईअड्डे पर उतरा। मोदी के पांच देशों की यात्रा के बाद उनकी पांच अहम
बातों की भी चर्चाएं हो रही हैं। तो आइए जानते हैं क्या हैं वो पांच अहम
बातें।
भारत को एक्स्लुसिव न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) के सदस्य देशों के तौर पर सम्मिलित किये जाने पर स्विट्जरलैंड, अमेरिका और मेक्सिको जैसे देशों का समर्थन मिला। यह ग्रुप वैश्विक स्तर पर न्यूक्लियर व्यापार की निगरानी करता है। मोदी की इस यात्रा का यह सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है।
अमेरिका और कतर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रवैये और उसकी जंग का समर्थन किया है। अतंरराष्ट्रीय स्तर के आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा खोलने और उसे खत्म करने के लिए कतर ने त्वरित कार्रवाई किए जाने की पैरवी की है। मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तान और उसके आस-पास के कुछ देशों को आतंकवाद का गढ़ बताया था और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की बात भी कही थी जिसका अमेरिका और कतर ने भी समर्थन किया।
मोदी के पांच देशों की यात्रा के दौरान कई अहम समझौतों पर भी दस्तखत हुए। इसमें भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मुख्य सैन्य सहयोगियों के तौर पर समझौता हुआ। इसके मद्देनजर दोनों देश एक-दूसरे के साथ सैन्य हथियार निर्माण के लिए सामानों की खरीद फरोख्त आसानी से कर सकेंगे।
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुए एक अहम समझौते के बाद अब बैंकिंग सिक्रेसी से पर्दा उठेगा। इसके मद्देनजर अब टैक्स चोरों से जुड़ी जानकारी, उनके पैसे व अन्य संम्पत्तियों का ब्यौरा एक-दूसरे के साथ साझा किया जाएगा। इससे कालाधन रखने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मोदी की महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक स्वच्छ ऊर्जा का अमेरिका ने भी समर्थन किया है और उसके प्रोत्साहन के लिए 20 मिलियन डॉलर के यूएस-इंडिया क्लिन एनर्जी फाइनांस (यूएसआईसीईएफ) फंड का गठन करने की घोषणा की जिसमें दोनों देश समान रूप से सहभागी होंगे। यह संगठन स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन देने का काम करेगी।
भारत को एक्स्लुसिव न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) के सदस्य देशों के तौर पर सम्मिलित किये जाने पर स्विट्जरलैंड, अमेरिका और मेक्सिको जैसे देशों का समर्थन मिला। यह ग्रुप वैश्विक स्तर पर न्यूक्लियर व्यापार की निगरानी करता है। मोदी की इस यात्रा का यह सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है।
अमेरिका और कतर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रवैये और उसकी जंग का समर्थन किया है। अतंरराष्ट्रीय स्तर के आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा खोलने और उसे खत्म करने के लिए कतर ने त्वरित कार्रवाई किए जाने की पैरवी की है। मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तान और उसके आस-पास के कुछ देशों को आतंकवाद का गढ़ बताया था और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की बात भी कही थी जिसका अमेरिका और कतर ने भी समर्थन किया।
मोदी के पांच देशों की यात्रा के दौरान कई अहम समझौतों पर भी दस्तखत हुए। इसमें भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मुख्य सैन्य सहयोगियों के तौर पर समझौता हुआ। इसके मद्देनजर दोनों देश एक-दूसरे के साथ सैन्य हथियार निर्माण के लिए सामानों की खरीद फरोख्त आसानी से कर सकेंगे।
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुए एक अहम समझौते के बाद अब बैंकिंग सिक्रेसी से पर्दा उठेगा। इसके मद्देनजर अब टैक्स चोरों से जुड़ी जानकारी, उनके पैसे व अन्य संम्पत्तियों का ब्यौरा एक-दूसरे के साथ साझा किया जाएगा। इससे कालाधन रखने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मोदी की महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक स्वच्छ ऊर्जा का अमेरिका ने भी समर्थन किया है और उसके प्रोत्साहन के लिए 20 मिलियन डॉलर के यूएस-इंडिया क्लिन एनर्जी फाइनांस (यूएसआईसीईएफ) फंड का गठन करने की घोषणा की जिसमें दोनों देश समान रूप से सहभागी होंगे। यह संगठन स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन देने का काम करेगी।


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