नई दिल्ली (सं.सू.)। ज्यादातर लोगों की तरह हमारे सांसदों को भी या तो इसका मतलब पता ही नहीं था या फिर उन्होंने इस पर अभी तक गौर नहीं किया। लेकिन मंगलवार को जब बीजेपी सांसद तरुण विजय ने राज्यसभा में ये मामला उठाया और VT का मतलब सांसदों को बताया तो ज्यादातर सांसदों का सिर शर्म से झुक गया। दरअसल दो अक्षर का ये शब्द बताता है कि किस तरह हम 87 सालों से गुलामी के एक प्रतीक को ढो रहे हैं और दुनिया को बता भी रहे हैं। VT का मतलब है 'Viceroy Territory' यानी वायसरॉय का इलाका।
अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, हर हवाई जहाज के उपर ये प्रमुखता से लिखा होना चाहिए कि वो किस देश का है, यानी उसकी पहचान क्या है। ये रजिस्ट्रेशन कोड पांच अक्षरों का होता है। पहले दो अक्षर देश का कोड होता है और उसके बाद के अक्षर ये दिखाते हैं कि हवाई जहाज की मालिक कौन सी कंपनी है। देश को ये कोड इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) देती है।
भारत को ICOA से 'Viceroy Territory' (VT) कोड 1929 में तब मिला था, जब यहां अंग्रेजों का राज था। लेकिन हैरानी की बात है कि 87 साल बीत जाने के बाद भी भारत अपनी गुलामी की इस पहचान को बदलने में नाकाम रहा है। मंगलवार को जब ये मामला संसद में उठा तो सभी पार्टियों के सांसदों ने सरकार से एक स्वर में मांग की कि इस नाम से जल्दी से जल्दी छुटकारा पाया जाए। मामले को उठाने वाले बीजेपी सांसद तरुण विजय ने कहा कि हैरानी की बात है कि चीन, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और फिजी जैसे देशों ने भी अपने देश का कोड बदल कर नया कोड हासिल कर लिया। लेकिन भारत अभी तक ये करने में नाकाम रहा है।
सच्चाई ये है कि यूपीए सरकार के दौरान भारत की तरफ से इस बारे में आधी अधूरी कोशिश की गई थी। भारत ने BA (भारत) या IN (इंडिया) कोड हासिल करने की कोशिश की। लेकिन पता चला कि B कोड चीन और I कोड इटली पहले ही ले चुका है। इसके बाद तत्कालीन सिविल एविएशन मिनिस्टर प्रफुल्ल पटेल ने ऐलान कर दिया कि भारत VT कोड ही जारी रखेगा।
अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, हर हवाई जहाज के उपर ये प्रमुखता से लिखा होना चाहिए कि वो किस देश का है, यानी उसकी पहचान क्या है। ये रजिस्ट्रेशन कोड पांच अक्षरों का होता है। पहले दो अक्षर देश का कोड होता है और उसके बाद के अक्षर ये दिखाते हैं कि हवाई जहाज की मालिक कौन सी कंपनी है। देश को ये कोड इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) देती है।
भारत को ICOA से 'Viceroy Territory' (VT) कोड 1929 में तब मिला था, जब यहां अंग्रेजों का राज था। लेकिन हैरानी की बात है कि 87 साल बीत जाने के बाद भी भारत अपनी गुलामी की इस पहचान को बदलने में नाकाम रहा है। मंगलवार को जब ये मामला संसद में उठा तो सभी पार्टियों के सांसदों ने सरकार से एक स्वर में मांग की कि इस नाम से जल्दी से जल्दी छुटकारा पाया जाए। मामले को उठाने वाले बीजेपी सांसद तरुण विजय ने कहा कि हैरानी की बात है कि चीन, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और फिजी जैसे देशों ने भी अपने देश का कोड बदल कर नया कोड हासिल कर लिया। लेकिन भारत अभी तक ये करने में नाकाम रहा है।
सच्चाई ये है कि यूपीए सरकार के दौरान भारत की तरफ से इस बारे में आधी अधूरी कोशिश की गई थी। भारत ने BA (भारत) या IN (इंडिया) कोड हासिल करने की कोशिश की। लेकिन पता चला कि B कोड चीन और I कोड इटली पहले ही ले चुका है। इसके बाद तत्कालीन सिविल एविएशन मिनिस्टर प्रफुल्ल पटेल ने ऐलान कर दिया कि भारत VT कोड ही जारी रखेगा।

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