फ्रेंकफर्ट (सं.सू.)। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) भारत को अपनी उधारी इस साल बढ़ाकर तीन अरब डालर करने का इच्छुक है ताकि देश में ‘मजबूत वृद्धि’ का समर्थन किया जा सके। एडीबी के अध्यक्ष ताकेहिको नाकाओ ने बैंक की सालाना बठक में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा, ‘मार्च में अपनी यात्रा के दौरान मैंने भारत को कर्ज बढ़ाने के बारे में विचार-विमर्श किया। भारत को बुनियादी ढांचे के लिए अधिक वित्तपोषण की जरूरत है और हमें यह करके खुशी होगी ताकि भारत में और मजबूत वृद्धि का समर्थन किया जा सके।’ उन्होंने कहा कि बैंक की योजना भारत को अपनी उधारी बढ़ाकर इस साल तीन अरब डालर करने की है जबकि 2015 में उसने लगभग 2.2 अरब डालर का कर्ज दिया था। यह उधार सरकारी स्तर पर दिया गया।
उन्होंने कहा कि अगर इसमें निजी क्षेत्र के उधार को भी शामिल कर लिया जाए तो यह 3.5 अरब डालर तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि यह उधारी भी अगले साल तक बढ़कर चार अरब डालर पर पहुंच जाएगी। एडीबी ने 1986 में भारत में अपना उधार कार्य करना शुरू किया। इस दौरान एडीबी ने सरकार के स्तर पर कुल 33.1 अरब डालर के 197 कर्ज को मंजूरी दी। 31 दिसंबर 2015 की स्थिति के अनुसार इसमें 11.4 अरब डालर के 84 ऋण चल रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘मार्च में अपनी यात्रा के दौरान मैंने भारत को कर्ज बढ़ाने के बारे में विचार-विमर्श किया। भारत को बुनियादी ढांचे के लिए अधिक वित्तपोषण की जरूरत है और हमें यह करके खुशी होगी ताकि भारत में और मजबूत वृद्धि का समर्थन किया जा सके।’ उन्होंने कहा कि बैंक की योजना भारत को अपनी उधारी बढ़ाकर इस साल तीन अरब डालर करने की है जबकि 2015 में उसने लगभग 2.2 अरब डालर का कर्ज दिया था। यह उधार सरकारी स्तर पर दिया गया।
उन्होंने कहा कि अगर इसमें निजी क्षेत्र के उधार को भी शामिल कर लिया जाए तो यह 3.5 अरब डालर तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि यह उधारी भी अगले साल तक बढ़कर चार अरब डालर पर पहुंच जाएगी। एडीबी ने 1986 में भारत में अपना उधार कार्य करना शुरू किया। इस दौरान एडीबी ने सरकार के स्तर पर कुल 33.1 अरब डालर के 197 कर्ज को मंजूरी दी। 31 दिसंबर 2015 की स्थिति के अनुसार इसमें 11.4 अरब डालर के 84 ऋण चल रहे थे।

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