Wednesday, May 4, 2016

जांच उन पर केन्द्रित होगी, जिनका नाम इटली के कोर्ट के फैसले में आया-पर्रिकर

नयी दिल्ली (सं.सू.)। विवादास्पद अगस्ता वेस्टलैंड सौदे को लेकर पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर निशाना साधते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बुधवार को कहा कि मौजूदा जांच उन पर केन्द्रित होगी, जिनका नाम इटली की अदालत के फैसले में आया है। साथ ही उन्होंने यह सुझाव दिया कि अदृश्य हाथ की भूमिका ने पूर्व में इस मामले की समुचित जांच को रोका।

पर्रिकर ने अगस्ता वेस्टलैंड सौदे पर राज्यसभा में हुई अल्पकालिक चर्चा के जवाब में यह बातें कहीं। उन्होंने तथा संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराये जाने की कांग्रेस सहित विपक्षी दलों की मांग को खारिज कर दिया, जिसके विरोध में कांग्रेस और जदयू ने सदन से वाकआउट किया।

बारह वीवीआईपी हेलीकाप्टरों के लिए 3600 करोड़ रूपये के इस सौदे के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि संप्रग अगस्ता वेस्टलैंड के हेलीकाप्टरों को खरीदने के लिए लगातार जोर डाल रहा था।

उन्होंने इस मामले का तिथिवार ब्यौरा देते हुए कहा कि सीबीआई ने 12 मार्च 2013 को एक मामला दर्ज किया था किन्तु उसने नौ माह तक प्राथमिकी की प्रति को प्रवर्तन निदेशालय को नहीं दिया। उसके बाद ईडी ने जुलाई तक प्राथमिकी पर कोई कार्रवाई नहीं की।

पर्रिकर ने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि कोई अदृश्य हाथ सीबीआई एवं ईडी की कार्रवाई या निष्क्रियता का मार्गदर्शन कर रहा था।

जांच जारी होने की ओर ध्यान दिलाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, जांच उन लोगों की भूमिका पर केन्द्रित होगी, जिनका नाम इटली की अदालत के फैसले में आया है, सरकार घोटाले में शामिल लोगों को कानून के दायरे में लाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोडे़गी।

उन्होंने कहा कि सीबीआई ने काफी जांच कर ली है और वह फिलहाल रिश्वत का धन कहां कहां गया इसका पता लगाने की कोशिश कर रही है।

पर्रिकर ने गुलमर्ग एवं श्रीनगर में हेलीकाप्टरों की उड़ानें के बारे में भारतीय वायु सेना की लिखित टिप्पणियों संबंधी एक फाइल का उल्लेख करते हुए कहा कि सौभाग्य से यह तीन जून 2014 की विनाशकारी आग से बच गयी।

उन्होंने कहा कि यह खुले में होने की बजाय एक अधिकारी की दराज में रखी थी।

रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय संप्रग ने विदेश मंत्रालय, दूतावास एवं अदालत को लिखा। उन्होंने कहा, सौदे को रद्द करने में करीब दो वर्ष लग गये, वास्तव में पहले तीन हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति को टाला जा सकता था।

पर्रिकर ने आरोप लगाया कि हेलीकाप्टरों को बढ़े हुए मूल्यों पर लाया गया तथा मूल्य सौदेबाजी के लिए कोई वास्तविक आधार नहीं मुहैया कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आफसेटस के लिए चयनित कंपनियों में से एक आईडीएस इंफोटेक का इस्तेमाल रिश्वत का धन देने के लिए माध्यम के तौर पर किया गया।

पर्रिकर ने कहा, मिलान अपील अदालत के फैसले पर गौर करने के बाद रक्षा मंत्रालय ने ईडी एवं सीबीआई दोनों को लिखा है कि वे फैसले की विषय सामग्री पर ध्यान दें तथा जांच को तेजी से संपन्न करें। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा मंत्रालय ने सम्बद्ध कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने तथा हर्जाने की वूसली की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

अपना जवाब शुरू करते हुए रक्षा मंत्री ने वादा किया वह कोई नाम नहीं लेंगे ताकि शोरशराबा न मचे। उन्होंने अकबर बीरबल से जुड़ा एक किस्सा सुनाते हुए कांग्रेस पर परोक्ष हमला किया।्र

उन्होंने कहा, देश जानना चाहता है कि भ्रष्टाचार को किसने प्रोत्साहन व समर्थन दिया और कौन लाभान्वित हुआ। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे।

रक्षा मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि यह एक तथ्य है कि मिलान की अदालत के ताजा फैसले में आये व्यापक ब्यौरों ने इस बात को रखा कि मामले में भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा, निर्णय प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर कुछ बातों को त्यागने और कुछ को अपनाने से दुर्भावनापूर्ण एवं भ्रष्ट कार्रवाई का संकेत मिलते हैं। यह सब किसी विशेष विक्रेता के पक्षपात के मकसद से किया गया।

संप्रग सरकार को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर का फील्ड ट्रायल इटली में हुआ जबकि यह अनिवार्य था कि इसे भारतीय परिस्थितियों में किया जाना चाहिए था। पर्रिकर ने कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड ने जिन हेलीकॉप्टर की पेशकश की थी वे विकास के चरण में ही थे इसलिए परीक्षण किसी अन्य हेलीकॉप्टर पर किया गया।

उन्होंने पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी पर भी निशाना साधा, जिन्होंने कहा था कि ट्रायल के बारे में उन्होंने अपनी आपत्ति लिखित में दी थी। उन्होंने कहा कि एंटनी की ऐसा करने की आदत है।

पर्रिकर ने अपना अधिकतर जवाब लिखित दस्तावेज को पढ़कर दिया। कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों ने मंत्री द्वारा बयान पढ़े जाने पर आपत्ति की। आनंद शर्मा ने कहा कि नियमों के तहत मंत्री को सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए।

जदयू के शरद यादव ने कहा कि उन्हें लिखित बयान से कोई आपत्ति नहीं है। उनकी समस्या उनके लंबे बयान से है। सदस्यों की आपत्ति को खारिज करते हुए उपसभापति पी जे कुरियन ने कहा कि नियमों के अनुसार मंत्री अपना भाषण तैयार कर सकते हैं और उसे पढ़ सकते हैं।

विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि चार घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुयी और सभी सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए। लेकिन अब मंत्री पढ रहे हैं। यह अपमान है। अगर उन्हें पढ़ना ही था तो सदस्यों के बीच बयान वितरण किया जाना चाहिए था।

संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि यह अल्पकालिक चर्चा है और सामान्य रूप से यह चर्चा ढाई घंटे की होती है। लेकिन समय बढ़ाया गया क्योंकि कई सदस्य इसमें भाग लेना चाहते थे। अब अगर मंत्री सभी जानकारी साक्षा करना चाहते हैं तो वह बोल सकते हैं।

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