नई दिल्ली (सं.सू.)। दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय का 17 साल बाद गर्दन में फंसी गोली का अॉपरेशन तो सफल रहा लेकिन आम आदमी पार्टी के मंत्री सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने से नहीं बच पाए।
17 साल में पैसे न होने की वजह से अॉपरेशन को टालते रहे फिर जब मंत्री बनने के बाद अॉपरेशन कराया तो मंहगे प्राइवेट अपोलो अस्पताल में जबकि आम आदमी पार्टी के नेता सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पताल में आवाम को इलाज और शिक्षा देने की एकतरफ बात करते हैं। दिल्ली में भी लोहिया, एम्स औऱ जीबी पंत जैसे कई सरकारी अस्पताल है फिर क्यों आम आदमी पार्टी के मंत्री गोपाल राय ने अपोलो में अपना अॉपरेशन कराया ऐसे सवाल सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा उठाए जा रहे हैं।
आपको बता दें कि गोपाल राय के गर्दन से 17 साल बाद गोली निकाली गई है। साल 1999 में एक छात्र प्रदर्शन के दौरान लखनऊ में उन्हें यह गोली लगी थी। डॉक्टर्स का कहना है कि गोली उनकी गर्दन के नीचे फंस गई थी, जो समय के साथ रीढ़ की हड्डी के पास पहुंच गई।
उस समय इस गोली को नहीं निकाला जा सका क्योंकि तब इसका ऑपरेशन बेहद जटिल और जोखिम भरा बताया गया था। डॉक्टरों की राय के बाद राय ने तब गोली निकलवाने का ख्याल छोड़ दिया था। अचानक तकलीफ बढ़ने पर राय ने अपोलो के डॉक्टरों से मशविरा लिया। तमाम जांचों के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ऑपरेशन के लिए हरी झंडी दे दी।
शुक्रवार को उनका ऑपरेशन किया गया। राय के करीबी सहयोगी ने बताया कि ऑपरेशन के बाद उनकी हालत स्थिर है। उपराज्यपाल नजीब जंग, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने भी अस्पताल में उनसे मुलाकात की।
17 साल में पैसे न होने की वजह से अॉपरेशन को टालते रहे फिर जब मंत्री बनने के बाद अॉपरेशन कराया तो मंहगे प्राइवेट अपोलो अस्पताल में जबकि आम आदमी पार्टी के नेता सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पताल में आवाम को इलाज और शिक्षा देने की एकतरफ बात करते हैं। दिल्ली में भी लोहिया, एम्स औऱ जीबी पंत जैसे कई सरकारी अस्पताल है फिर क्यों आम आदमी पार्टी के मंत्री गोपाल राय ने अपोलो में अपना अॉपरेशन कराया ऐसे सवाल सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा उठाए जा रहे हैं।
आपको बता दें कि गोपाल राय के गर्दन से 17 साल बाद गोली निकाली गई है। साल 1999 में एक छात्र प्रदर्शन के दौरान लखनऊ में उन्हें यह गोली लगी थी। डॉक्टर्स का कहना है कि गोली उनकी गर्दन के नीचे फंस गई थी, जो समय के साथ रीढ़ की हड्डी के पास पहुंच गई।
उस समय इस गोली को नहीं निकाला जा सका क्योंकि तब इसका ऑपरेशन बेहद जटिल और जोखिम भरा बताया गया था। डॉक्टरों की राय के बाद राय ने तब गोली निकलवाने का ख्याल छोड़ दिया था। अचानक तकलीफ बढ़ने पर राय ने अपोलो के डॉक्टरों से मशविरा लिया। तमाम जांचों के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ऑपरेशन के लिए हरी झंडी दे दी।
शुक्रवार को उनका ऑपरेशन किया गया। राय के करीबी सहयोगी ने बताया कि ऑपरेशन के बाद उनकी हालत स्थिर है। उपराज्यपाल नजीब जंग, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने भी अस्पताल में उनसे मुलाकात की।


1 comment:
Aadmi to aam hai per baate khas hai.
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