नयी दिल्ली (सं.सू.)। RTI के माध्यम से अरविन्द केजरीवाल के ऊपर अबतक का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है, इस RTI से प्राप्त जानकारी के मुताबिक केजरीवाल ने IIT खड़गपुर में फर्जी तरीके से एडमिशन लिया था।
RTI के माध्यम से पूछा गया कि केजरीवाल ने किस तरह से एडमिशन लिया, चूकी IIT में एडमिशन पाने के IIT द्वारा आयोजित IIT-JEE इंट्रान्स एग्जाम देना होता है और प्राप्त रैंक के आधार पर एडमिशन होता है, पर IIT खड़गपुर के पास से केजरीवाल का कोई IIT-JEE रैंक कार्ड नहीं मिला!
अब सवाल यह उठता है कि केजरीवाल ने बिना IIT-JEE रैंक के एडमिशन पाया कैसे, दरअसल 1952 से 2005 तक IIT में खाली सीट को भरने के लिए गैरकानूनी ढंग से कोटे का इस्तेमाल किया जाता था जो IIT के स्टाफ या उनके रिश्तेदारों को दिया जाता था जिसका इस्तेमाल करके वो किसी का भी एडमिशन करा देते थे।
तब IIT खड़गपुर के डारेक्ट प्रोफेसर G. S. Sanyal ने ही केजरीवाल को कोटे के माद्यम से एडमिशन दिलवाया था जिनके जिंदल से काफी करीबी रिश्ते थे और केजरीवाल के पिता जिंदल ग्रुप में एक वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थे।
RTI के माध्यम से पूछा गया कि केजरीवाल ने किस तरह से एडमिशन लिया, चूकी IIT में एडमिशन पाने के IIT द्वारा आयोजित IIT-JEE इंट्रान्स एग्जाम देना होता है और प्राप्त रैंक के आधार पर एडमिशन होता है, पर IIT खड़गपुर के पास से केजरीवाल का कोई IIT-JEE रैंक कार्ड नहीं मिला!
अब सवाल यह उठता है कि केजरीवाल ने बिना IIT-JEE रैंक के एडमिशन पाया कैसे, दरअसल 1952 से 2005 तक IIT में खाली सीट को भरने के लिए गैरकानूनी ढंग से कोटे का इस्तेमाल किया जाता था जो IIT के स्टाफ या उनके रिश्तेदारों को दिया जाता था जिसका इस्तेमाल करके वो किसी का भी एडमिशन करा देते थे।
तब IIT खड़गपुर के डारेक्ट प्रोफेसर G. S. Sanyal ने ही केजरीवाल को कोटे के माद्यम से एडमिशन दिलवाया था जिनके जिंदल से काफी करीबी रिश्ते थे और केजरीवाल के पिता जिंदल ग्रुप में एक वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थे।

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