नई दिल्ली (सं.सू.)। अमेरिका के आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बनने की दौड़ में शामिल रियल स्टेट मुगल डोनाल्ड ट्रंप ने एक बहस में कहा है कि अगर पाकिस्तान अस्थिर हो जाता है तो अमेरिका को उसके एटम बम छीन लेने चाहिए। ट्रंप ने कहा कि भारत को भी ऐसी योजना में शामिल करना चाहिए, लेकिन ये कल्पना नहीं है।ऐसी रिपोर्ट है कि अमेरिका के पास सचमुच ऐसा सीक्रेट प्लान है। अमेरिकी मीडिया उस सीक्रेट प्लान का खुलासा कर चुका है, जिसमें किसी न किसी तरह से भारत की भी भूमिका मुमकिन है। भारत से नफरत की बुनियाद पर बना पाकिस्तान। जो मुल्क अपनी भूखी जनता का पेट नहीं भर सकता, वो मुल्क खुद को परमाणु हथियारों से लैस कर चुका है।
पाकिस्तान के पास एफ-16 जैसे विमान और हत्फ पांच जैसी मिसाइलें हैं। यानी वो हथियार जिनके जरिए पाकिस्तान करीब 2500 किलोमीटर की दूरी तक कहीं भी परमाणु हथियार गिरा सकता है। बेशक पाकिस्तान परमाणु हथियारों से लैस मुल्क है, लेकिन अमेरिका में अगले राष्ट्रपति के चुनाव के लिए जारी बहस के शुरुआती दौर में ये मुद्दा अहम हो चुका है कि क्या पाकिस्तान जैसे मुल्क के हाथ में परमाणु हथियार सुरक्षित हैं। और अगर नहीं तो दुनिया को पाकिस्तान जैसे मुल्क के परमाणु हथियार से कैसे बचाया जाए?
ऐसे सवाल पिछले 10 बरस से पूछे जा रहे हैं। इन 10 बरस में पाकिस्तान में जैसी घटनाएं हुईं, उन्होंने ये आशंका मजबूत की है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार सुरक्षित नहीं हैं। आतंकी गुट पाकिस्तानी फौज के उन ठिकानों को निशाना बनाने में कामयाब हो चुके हैं, जो परमाणु बेस कहे जाते हैं।
अगस्त 2012, परमाणु ठिकाने पर हमला- तीन साल पहले पाकिस्तानी पंजाब के कमरा में मिनहास एयरबेस पर आतंकियों ने हमला कर कई प्लेन क्षतिग्रस्त कर दिए थे। मिनहास एयरबेस को पाकिस्तान का प्रमुख परमाणु ठिकाना माना जाता है।
मई 2011, परमाणु ठिकाने पर हमला- साल 2011 में कराची में नेवल एयर बेस पीएनएस मेहरान पर हमला हुआ, जहां से एटमी बेस महज 15 किलोमीटर दूर था। अक्टूबर 2009 में आतंकी रावलपंडी में सेना के हेडक्वार्टर पर भी आतंकी हमला कर चुके हैं। हाल ही में 18 सितंबर 2015 को आतंकी पेशावर के एयरफोर्स बेस पर भी हमला कर चुके हैं।
पाकिस्तान के एटमी जखीरे को खतरा पाकिस्तानी फौज के कट्टरपंथी अफसरों से भी है, जिनकी सिस्टम में गहरी जड़ें हैं। फेल्ड नेशन कहे जाने वाले पाकिस्तान को लेकर ये आशंकाएं भी हैं कि एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जब वहां पूर्ण अराजकता आ जाए। ऐसे में सवाल ये है कि पाकिस्तान के परमाणु जखीरे का क्या होगा? अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के शुरुआती दौर में भी ये सवाल पूछा जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के शुरुआती दौर में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार की दौड़ में शामिल डोनाल्ड ट्रंप से भी ये सवाल पूछा गया। उन्होंने जो जवाब दिया उसने चार साल पुरानी बहस को फिर जिंदा कर दिया है। बहस का मुद्दा ये है कि क्या पाक के एटमी जखीरे पर कब्जा कर सकता है अमेरिका?
एक रेडियो इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि पाकिस्तान में अस्थिरता आने की सूरत में परमाणु हथियारों पर कब्जे के अभियान में भारत को शामिल किया जाना चाहिए। रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति प्रत्याशी के बड़े दावेदार बनते दिख रहे डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने उस सीक्रेट प्लान को लेकर बहस छेड़ दी है। कहा जाता है कि जिसका मकसद पाकिस्तान में अस्थिरता के हालात में उसके एटमी हथियारों को छीन लेना है। 'स्नैच एंड ग्रैब' नाम के इस प्लान की अमेरिका ने कभी पुष्टि नहीं की, लेकिन इससे जुड़ी खबरों को कभी मजबूती से नकारा भी नहीं।
पाकिस्तान के ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए की गई कमांडो कार्रवाई से ये साबित हो चुका है कि अपने हितों की रक्षा के लिए अमेरिका किस हद तक जा सकता है। लिहाजा संकट के क्षणों में पाकिस्तान के एटमी जखीरे पर कब्जे की योजना मौजूद है, इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता है। साल 2009 और 2011 में इस योजना से तब पर्दा उठ गया था, जब अमेरिकी मीडिया ने बताया कि एक स्पेशल ग्रुप है-जो एटमी जखीरे पर कब्जे की योजना पर लंबे वक्त से काम कर रहा है।
ये योजना एक तेज फौजी ऑपरेशन के जरिए पाकिस्तान के करीब एक दर्जन परमाणु बेस पर पहुंच कर एटमी हथियारों को नाकाम करने या उनके ट्रिगर को कब्जे में ले लेने की है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद सवाल ये भी है कि क्या इस योजना में भारत का भी कोई किरदार है।

No comments:
Post a Comment