अंतालिया (सं.सू.)। पारदर्शी व भेदभाव रहित वैश्विक व्यापार प्रणाली की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के बाली समझौते के सभी तत्वों का पूरी तरह कार्यान्वयन होना चाहिए।
मोदी ने यहां जी20 शिखर सम्मेलन में दोपहर भोज के समय ‘व्यापार व ऊर्जा’ विषय पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए यह मांग उठायी। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में नरमी एक प्रमुख चिंता है और व्यापार की गति में सुधार का परिदृश्य कमजोर बना हुआ है।
मोदी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि को तेज करने के प्रयासों से व्यापार को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि पारदर्शी, निष्पक्ष, भेदभाव रहित तथा नियम आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘दोहा विकास दौर के लक्ष्यों को हासिल किया जाना बहुत जरूरी है। बाली पैकेज के सभी तत्वों का पूरी तरह कार्यान्वयन होना चाहिए। हमें दिसंबर में नैरोबी बैठक में सफल परिणाम की उम्मीद है।’ डब्ल्यूटीओ की 10वीं मंत्री स्तरीय बैठक 15-18 दिसंबर को नैरोबी, कीनिया में होनी है।
बाली, इंडोनेशिया में पिछली बैठक में डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों ने व्यापार सुगमता समझौते तथा खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य से खाद्यान्न भंडारण पर सहमति जताई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय व्यापार समझौतों के बारे में कहा कि इस तरह के समझौतों से ‘वैश्विक व्यापार प्रणाली का विखंडन नहीं होना चाहिए बल्कि इनसे अधिक उदार बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को समर्थन मिलना चाहिए।’ उन्होंने कहा वैश्विक मूल्य वर्धन शृंखला (वेल्यू चैन) में लघु व मझौले उप्रकमों की भूमिका बढने से वैश्विक रोजगार बढाने में मदद मिलेगी। मोदी ने कहा कि संतुलित व सतत वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए श्रम गतिशीलता व कौशल ‘पोर्टेबिलिटी’ बढ़ाने की जरूरत होगी।
ऊर्जा क्षेत्र पर प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के इस समूह जी20 को स्वच्छ व अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान व विकास बढाना चाहिए तथा लागत घटानी चाहिए ताकि इसे सबके लिए वहनीय व पहुंच वाला बनाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने स्वच्छ उर्जा की उपलब्धता व परिवर्तन के लिए वित्तीय मदद व प्रौद्योगिकी स्थानांतरण बढाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जी20 उर्जा के लिए वैश्विक संचालन ढांचे में प्रमुख उदीयमान अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन कदमों से,‘हमारी ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी, जलवायु परिवर्तन का मुकाबला किया जा सकेगा और भारी आर्थिक अवसर पैदा होंगे।’ उन्होंने कहा कि तीन मूल चुनौतियां हैं जिनमें विकासशील देशों में वृद्धि को बल देने के लिए ऊर्जा, अब तक ऊर्जा (बिजली) से वंचित करोड़ों लोगों की जरूरतों को पूरा करना तथा स्वच्छ व अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढावा देना शामिल है।’
प्रधानमंत्री ने कहा,‘ऊर्जा, पारिस्थितिकी व अर्थव्यवस्था एक दूसरे से गहरे से सम्बद्ध है। यही कारण है कि भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को जहां तक संभव को सतत तरीके से पूरा करना चाहता है।’ उन्होंने कहा कि भारत 2022 तक अक्षय ऊर्जा उत्पादन में 175 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता हासिल करने तथा जीवाश्म ईंधन सब्सिडी में कटौती का लक्ष्य लेकर चल रहा है। देश ने कोयले पर कार्बन उपकर लगाया है।
मोदी ने यहां जी20 शिखर सम्मेलन में दोपहर भोज के समय ‘व्यापार व ऊर्जा’ विषय पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए यह मांग उठायी। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में नरमी एक प्रमुख चिंता है और व्यापार की गति में सुधार का परिदृश्य कमजोर बना हुआ है।
मोदी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि को तेज करने के प्रयासों से व्यापार को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि पारदर्शी, निष्पक्ष, भेदभाव रहित तथा नियम आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘दोहा विकास दौर के लक्ष्यों को हासिल किया जाना बहुत जरूरी है। बाली पैकेज के सभी तत्वों का पूरी तरह कार्यान्वयन होना चाहिए। हमें दिसंबर में नैरोबी बैठक में सफल परिणाम की उम्मीद है।’ डब्ल्यूटीओ की 10वीं मंत्री स्तरीय बैठक 15-18 दिसंबर को नैरोबी, कीनिया में होनी है।
बाली, इंडोनेशिया में पिछली बैठक में डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों ने व्यापार सुगमता समझौते तथा खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य से खाद्यान्न भंडारण पर सहमति जताई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय व्यापार समझौतों के बारे में कहा कि इस तरह के समझौतों से ‘वैश्विक व्यापार प्रणाली का विखंडन नहीं होना चाहिए बल्कि इनसे अधिक उदार बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को समर्थन मिलना चाहिए।’ उन्होंने कहा वैश्विक मूल्य वर्धन शृंखला (वेल्यू चैन) में लघु व मझौले उप्रकमों की भूमिका बढने से वैश्विक रोजगार बढाने में मदद मिलेगी। मोदी ने कहा कि संतुलित व सतत वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए श्रम गतिशीलता व कौशल ‘पोर्टेबिलिटी’ बढ़ाने की जरूरत होगी।
ऊर्जा क्षेत्र पर प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के इस समूह जी20 को स्वच्छ व अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान व विकास बढाना चाहिए तथा लागत घटानी चाहिए ताकि इसे सबके लिए वहनीय व पहुंच वाला बनाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने स्वच्छ उर्जा की उपलब्धता व परिवर्तन के लिए वित्तीय मदद व प्रौद्योगिकी स्थानांतरण बढाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जी20 उर्जा के लिए वैश्विक संचालन ढांचे में प्रमुख उदीयमान अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन कदमों से,‘हमारी ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी, जलवायु परिवर्तन का मुकाबला किया जा सकेगा और भारी आर्थिक अवसर पैदा होंगे।’ उन्होंने कहा कि तीन मूल चुनौतियां हैं जिनमें विकासशील देशों में वृद्धि को बल देने के लिए ऊर्जा, अब तक ऊर्जा (बिजली) से वंचित करोड़ों लोगों की जरूरतों को पूरा करना तथा स्वच्छ व अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढावा देना शामिल है।’
प्रधानमंत्री ने कहा,‘ऊर्जा, पारिस्थितिकी व अर्थव्यवस्था एक दूसरे से गहरे से सम्बद्ध है। यही कारण है कि भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को जहां तक संभव को सतत तरीके से पूरा करना चाहता है।’ उन्होंने कहा कि भारत 2022 तक अक्षय ऊर्जा उत्पादन में 175 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता हासिल करने तथा जीवाश्म ईंधन सब्सिडी में कटौती का लक्ष्य लेकर चल रहा है। देश ने कोयले पर कार्बन उपकर लगाया है।


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