Monday, November 9, 2015

बक्सर के मशहूर डाक्टर के बेटे हैं भारत के नए चाणक्य प्रशांत किशोर

बक्सर (सं.सू.)। हवा का रुख बदलना उनकी फितरत में है। लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा ने अगर अगर उनकी बेकद्री न की होती तो कदाचित वह बिहार में जश्न मना रही होती।

दरअसल बिहार में हवा का रुख बदलनेवाला कोई और नहीं है बल्कि वही व्यक्ति है जिसने 2014 में मोदी को दिल्ली की कुर्सी तक पहुँचाया था। नाम है प्रशांत किशोर और वे रहनेवाले हैं बक्सर के। महागठबंधन की प्रचंड जीत के पीछे जिस चाणक्य प्रशांत किशोर का दिमाग माना जा रहा है, वे बक्सर के ही हैं।

आज की तारीख में भारत में मीडिया कैंपेन के सबसे ब्रांड बन चुके प्रशांत किशोर यानी पीके बक्सर के जाने-माने चिकित्सक डा.श्रीकांत पांडेय के पुत्र हैं। औद्योगिक थाना क्षेत्र के निरंजनपुर में रहने वाने डॉक्टर साहब के दो बेटों में पीके दूसरे नंबर पर हैं और उनकी शुरुआती परवरिश बक्सर में ही हुई। बाद में पढ़ाई के लिए पटना गए और वहीं साइंस कालेज से प्लस टू की परीक्षा पास की।

पीके के बड़े भाई अजय कुमार बताते हैं कि पीके ने बाद में हैदराबाद में तकनीकी संस्थान से डिग्री हासिल की और यूनिसेफ के हेल्थ प्रोग्राम से जुड़ गये। पटना में व्यवसाय करने वाले अजय बताते हैं कि प्रशांत ने यूनिसेफ के साथ दक्षिण अफ्रिका में काम किया। चार साल पहले वे वापस आए तो गुजरात में नरेन्द्र मोदी के कैंपेन से जुड़े। बाइव्रेंट गुजरात प्रशांत का ही कैंपेन था जो बेहद सफल रहा। 2014 में नमो के सियासी कैंपेन ने पूरे देश में उन्हें पहचान दिला दी। पिछले साल नीतीश कुमार से जुड़ने के बाद वे कभी-कभार बक्सर घर आते रहे।

भाई अजय बताते हैं कि प्रशांत मीडिया से दूर अपने काम पर भरोसा करते हैं और जो एक बार ठान लेते हैं, उसे पूरा करने में मिशन की तरह दिन-रात जुट जाते हैं। यही वजह है कि आज भी जब देश-दुनिया की मीडिया नीतीश कुमार की सफलता के प्रशांत किशोर को हाथों-हाथ ले रही है, तब उनका बक्सर स्थित अपना आवास इस कोलाहल से दूर है। बक्सर-आरा राजमार्ग के किनारे अपने आवास पर पिता डा.श्रीकांत पांडेय प्रैक्टिस करते हैं। हालांकि, अभी तकरीबन दो महीने से वे अपनी पत्नी इंदिरा पांडेय के साथ दिल्ली में रह रहे हैं। भाई अजय ने बताया कि प्रशांत की भी शादी हो चुकी है और परिवार दिल्ली में रहता है। वहीं, बक्सर आवास का देखदेरख करने वाले प्रमोद कुमार दुबे ने बताया कि प्रशांत भैया अक्सर आते रहते हैं। हालांकि, जून में जदयू का चुनावी कैंपेन शुरू करने के बाद पटना में रहते हुए भी उन्हें एक बार भी यहां आने की फुर्सत नहीं मिली।

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