Tuesday, November 10, 2015

मोदी-नीतीश के बाद अब ममता बनर्जी की नैय्या पार लगाएगी 'टीम प्रशांत'

नई दिल्ली। (सं.सू.)। साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिर ठीक एक साल बाद साल 2015 में नीतीश कुमार की नैय्या पार लगाने वाले रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनकी टीम अब साल 2016 में ममता बनर्जी की नैय्या पार लगाती दिखाई देंगे।

मोदी और नीतीश को ऐतिहासिक जीत दिलाने में प्रशांत किशोर और उनकी टीम का ही सबसे बड़ा हाथ है। इसी टीम ने परदे के पीछे काम करते हुए पहले मोदी और फिर नीतीश कुमार को ज़बरदस्त जीत का स्वाद चखाया है।

इन दोनों दिग्गजों को जीत दिलाने के बाद अब माना जा रहा है कि टीम प्रशांत किशोर अब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए काम करेंगे।

अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं और संभावना जताई जा रही है कि टीम प्रशांत किशोर ही मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इलेक्शन मैनेजमेंट का ज़िम्मा संभालेंगे।

सूत्रों के मुताबिक़ बिहार चुनाव में नीतीश कुमार की ज़बरदस्त जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने प्रशांत से संपर्क साधा है। संभावना जताई जा रही है कि इस सिलसिले में जल्द ही प्रशांत और उनकी टीम के साथ बैठकों का दौर शुरू हो सकता है।

हालाँकि ममता बनर्जी ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में इस सवाल पर कहा, ''फिलहाल अभी इस बारे में किसी तरह की चर्चा नहीं हुई है।''

दरअसल, बिहार चुनाव के नतीजों ने बीजेपी विरोधी पार्टियों को मोदी लहर के फीका पड़ने के संकेत दे दिए हैं। लेकिन फिर भी आने वाले चुनाव को किसी भी तरह से अलके में लेने के मूड में नहीं दिखाई दे रहे। ऐसे में दुबारा सत्ता का सुख भोगने की मंशा से ममता बनर्जी का टीम प्रशांत कुमार से 'डील' होने की संभावना बढ़ी हुई है। 

जानकारी में ये भी सामने आया है कि ममता बैनर्जी ही नहीं बल्कि टीम प्रशांत को तमिलनाडू की डीएमके पार्टी से भी संपर्क साधा गया है। साफ़ है कि एक के बाद एक दो बड़े चुनाव में जीत के लिए सफल रणनीति बनाने वाले प्रशांत की 'ब्रैंड वैल्यू' इस समय आसमान छू रही है।

गौरतलब है कि 37 वर्षीय प्रशांत और उनकी टीम ने ही बीते लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय इलेक्शन कैम्पेन के लिए काम किया था। मोदी की 'चाय पर चर्चा' और 3 डी रैलियां जैसे नवीन आइडिया इसी टीम की देन रहे हैं। 

नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक जीत दिलाने के ठीक बाद यही टीम बिहार चुनाव में नीतीश कुमार को जीत दिलाने के लिए रणनीति बनाने में जुट गई थी।

मोदी के लिए बनाया गया 'चाय पर चर्चा' की ही तर्ज़ पर नीतीश कुमार के लिए 'पर्चा पर चर्चा' का कैम्पेन चलाया गया। इस कैम्पेन के ज़रिये आम जनता से राज्य सरकार के बीते 10 साल की परफॉर्मेंस से उनकी राय मांगी गई थी। इसी कैम्पेन को आगे बढ़ाते हुए 'हर घर दस्तक' अभियान भी ज़ोर-शोर से चलाया गया।

प्रशांत किशोर साल 2011 में संयुक्त राष्ट्र में हेल्थ एक्सपर्ट की नौकरी को त्यागकर भारत लौट आये थे। प्रशांत ने आई-पेक नाम से नौजवानों की अपनी टीम तैयार की।  इस टीम के ज़्यादातर सदस्य एमबीए और आईआईटी ग्रेज्युएट हैं। 

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