पटना (सं.सू.)। केंद्र के बाद बिहार में भाजपा अपना कमाल दिखाने में कामयाब नहीं हो पाई। जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 9,13,561 मतदाताओं ने इनमें से कोई नहीं या नोटा विकल्प के पक्ष में मतदान किया।
जिसका नुकसान भी भाजपा को उठाना पड़ा। प्रदेश में विधानसभा की कुल 243 सीटें हैं। बिहार विधानसभा के लिए हुए चुनाव में 6.68 करोड़ मतदाताओं यानी 56.80 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। कुल मिलाकर 38 सीटों पर नोटा तीसरे स्थान पर रहा तो वहीं लगभग 5 दर्जन सीटों पर नोटा वोटों की संख्या हार-जीत के अंतर से ज्यादा रही। यह बिहार में लोकसभा या विधानसभा के किसी भी चुनाव में अब तक का सर्वाधिक मतदान है।
बिहार उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के बाद चुनाव आयोग द्वारा 2013 में शुरू किया गया था। 9,13,561 मतदाताओं ने तरजीह दी जो कुल मतों का करीब ढाई प्रतिशत है। बताया जाता है कि पिछले साल लोकसभा चुनाव में करीब 60 लाख मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था।
जिसका नुकसान भी भाजपा को उठाना पड़ा। प्रदेश में विधानसभा की कुल 243 सीटें हैं। बिहार विधानसभा के लिए हुए चुनाव में 6.68 करोड़ मतदाताओं यानी 56.80 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। कुल मिलाकर 38 सीटों पर नोटा तीसरे स्थान पर रहा तो वहीं लगभग 5 दर्जन सीटों पर नोटा वोटों की संख्या हार-जीत के अंतर से ज्यादा रही। यह बिहार में लोकसभा या विधानसभा के किसी भी चुनाव में अब तक का सर्वाधिक मतदान है।
बिहार उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के बाद चुनाव आयोग द्वारा 2013 में शुरू किया गया था। 9,13,561 मतदाताओं ने तरजीह दी जो कुल मतों का करीब ढाई प्रतिशत है। बताया जाता है कि पिछले साल लोकसभा चुनाव में करीब 60 लाख मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था।


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