अंताल्या (सं.सू.)। कालेधन के जोखिम से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की अपील करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जी20 के देशों से कहा कि वे विदेश में अघोषित सम्पत्तियों को जब्त कर उन्हें संबंधित देश में वापस भेजने की व्यवस्था करें।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की कोटा प्रणाली में प्रस्तावित सुधारों को तुरंत लागू किए जाने की मांग की भी ताकि उसमें भारत जैसे उभरते देशों की भूमिका बढ़े। उन्होंने नियम आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली पर भी जोर दिया और कहा कि नये क्षेत्री व्यापारिक समझौतों से वैश्विक व्यापार व्यवस्था में किसी प्रकार का बंटवारा नहीं होना चाहिए।
मोदी ने यहां जी20 शिखर सम्मेलन के पहले ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के नेताओं की अलग से हुई एक बैठक में इस समूह द्वारा शुरू किये गए बहुपक्षीय नव विकास बैंक (एनडीबी) का काम काज जल्द शुरू किये जाने पर जोर दिया। यह बैंक विश्व बैंक के एक प्रतिस्पर्धी के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, जी20 को वैश्विक वित्तीय संस्थाओं के पुनर्गठन के लिए किये गये निर्णयों के अनुपालन और बहुपक्षीय तथा क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाओं के बीच सहयोग बढाने पर ध्यान देना चाहिए। मुद्राकोष की संचालन व्यवस्था में सुधार के लिए 2010 में हुई सहमति के तहत भारत जैसे उभरते बाजारों को अपेक्षाकृत अधिक मताधिकार देने तथा संस्था के संसाधनों को दो गुना करने का फैसला किया गया है। अमेरिकी संसद का अनुमोदन न मिलने से इसके क्रियान्वयन में देरी हो रही है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की कोटा प्रणाली में प्रस्तावित सुधारों को तुरंत लागू किए जाने की मांग की भी ताकि उसमें भारत जैसे उभरते देशों की भूमिका बढ़े। उन्होंने नियम आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली पर भी जोर दिया और कहा कि नये क्षेत्री व्यापारिक समझौतों से वैश्विक व्यापार व्यवस्था में किसी प्रकार का बंटवारा नहीं होना चाहिए।
मोदी ने यहां जी20 शिखर सम्मेलन के पहले ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के नेताओं की अलग से हुई एक बैठक में इस समूह द्वारा शुरू किये गए बहुपक्षीय नव विकास बैंक (एनडीबी) का काम काज जल्द शुरू किये जाने पर जोर दिया। यह बैंक विश्व बैंक के एक प्रतिस्पर्धी के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, जी20 को वैश्विक वित्तीय संस्थाओं के पुनर्गठन के लिए किये गये निर्णयों के अनुपालन और बहुपक्षीय तथा क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाओं के बीच सहयोग बढाने पर ध्यान देना चाहिए। मुद्राकोष की संचालन व्यवस्था में सुधार के लिए 2010 में हुई सहमति के तहत भारत जैसे उभरते बाजारों को अपेक्षाकृत अधिक मताधिकार देने तथा संस्था के संसाधनों को दो गुना करने का फैसला किया गया है। अमेरिकी संसद का अनुमोदन न मिलने से इसके क्रियान्वयन में देरी हो रही है।


No comments:
Post a Comment