Monday, November 16, 2015

जी-20 बैठक में जलवायु परिवर्तन पर पीएम मोदी ने रखा सात सूत्री एजेंडा

अंताल्या (सं.सू.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में सोलर, विंड एनर्जी जैसे स्रोतों से उत्पादन क्षमता 2022 तक 175 गीगावाॅट करने और कोयला जैसे परंपरागत साधनों से बिजली उत्पादन के लिए सब्सिडी कम करने की घोषणा की। साथ ही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से यह सुनिश्चित करने को कहा कि हर साल ग्रीन क्लाइमेट फंड के लिए 100 अरब डॉलर जुटाए जाएं।

जी-20 समूह की बैठक में जलवायु परिवर्तन और विकास पर मोदी ने सात सूत्री एजेंडा पेश किया। इसमें कार्बन क्रेडिट की जगह ग्रीन क्रेडिट को लाने और 2030 तक शहरों का 30 फीसदी ट्रैफिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट में शिफ्ट करने जैसी बातें हैं। उन्होंने जीवन शैली में बदलाव पर भी जोर दिया। ऐसा विकास हो जिसमें प्रकृति के साथ समन्वय हो। प्रधानमंत्री ने सोलर एनर्जी से समृद्ध देशों का गठबंधन बनाने का प्रस्ताव रखा। पेरिस में होने वाले जलवायु शिखर सम्मेलन में इसे औपचारिक रूप दिया जाना है।

उन्होंने कहा कि भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए तीन अरब डाॅलर का राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष बनाया जाएगा। साथ ही कहा कि विकसित देशों को स्वच्छ ऊर्जा की वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्तीय साधन और तकनीकी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन पर एक सुझाव दिया। उन्होंने कहा है कि विदेश में पड़े कालेधन को फ्रीज कर उसे संबंधित देश को दे दिया जाना चाहिए। ब्रिक्स देशों के नेताओं के साथ बैठक में पीएम ने यह बात कही। उन्होंने जी-20 से 2030 तक पैसे भेजने की लागत कम करने की दिशा में काम करने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएमएफ के कोटे में तत्काल बदलाव किया जाना चाहिए ताकि भारत जैसे विकासशील देशों को ज्यादा अधिकार मिल सकें। आईएमएफ में इन देशों के वोटिंग अधिकार बढ़ाने पर 2010 में ही सहमति बनी थी। लेकिन अमेरिकी संसद ने अभी तक इसे मंजूरी नहीं दी है। ब्रिक्स देशों के न्यू डेवलपमेंट बैंक के बारे में उन्होंने कहा कि जल्दी ही यह काम करने लगेगा। इस बैंक से पहली फाइनेंसिंग क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट को दी जानी चाहिए। वह भी ब्रिक्स के सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका में।

भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ असैनिक परमाणु करार की आैपचारिकताएं पूरी होने की घोषणा की है। जी-20 सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट कर यह जानकारी दी। पिछले साल सितंबर में करार पर दस्तखत हुए थे। परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत किए बिना ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम हासिल करने वाला भारत पहला देश है।

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