नयी दिल्ली (सं.सू.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में बदलाव के लिए सुधार प्रक्रिया एक मैराथन दौड़ है, इसे फर्राटा नहीं मानना चाहिये। ऐसी पहलों का लक्ष्य लोगों के जीवन-स्तर में सुधार लाना होना चाहिए। मोदी ने कहा कि पिछले 17 महीनों के दौरान मुद्रास्फीति और विदेशी निवेश समेत अर्थव्यवस्था में चौतरफा सुधार हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने समावेशी सुधार पर जोर दिया जो केवल सुर्खियां बटोरने के लिये नहीं बल्कि आम आदमी की जिंदगी में सुधार के लिये है। इस सम्मेलन में देश और विदेश के अनेक अर्थशास्त्री भाग ले रहे हैं।
उधर, देश में बढ़ती असहिष्णुता पर जारी बहस के बीच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कुछ हिंसक अतिवादी समूहों द्वारा विचारों की स्वतंत्रता के अधिकार के खुले उल्लंघन की निंदा की और इस बात से सहमति जतायी कि यह राष्ट्र पर आघात है। पूर्व प्रधानमंत्री शुक्रवार को ‘नेहरू की विरासत का संरक्षण और भारत का भविष्य’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
श्री मोदी ने कहा कि हमने जब 17 महीने पहले सत्ता संभाली थी उसके मुकाबले भारत बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर बढ़ी है और मुद्रास्फीति घटी है, विदेशी निवेश बढ़ा है और चालू खाते का घाटा कम हुआ है, राजस्व बढ़ा है, राजकोषीय घाटा कम हुआ है और रुपया स्थिर हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आर्थिक सुधारों का लक्ष्य अखबारों की सुर्खियां बटोरना नहीं बल्कि गरीबों का जीवन बेहतर बनाना है। प्रधानमंत्री ने युवाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि उनका मकसद भारत को नौकरी सृजित करने वाला देश बनाना है।
इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार ने थोड़े समय में ही मुद्रा योजना से एक करोड़ 20 लाख नौकरियों की बुनियाद रख दी है। सत्रह महीने में अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार की बात कहते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेश में जमा काले धन और कर चोरी के खिलाफ सरकार की मुहिम के परिणामस्वरूप अब तक 10,500 करोड़ रुपये काला धन पकड़ा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने छठे दिल्ली आर्थिक कान्क्लेव के उद्घाटन बाद अपने भाषण में बुद्धिजीवियों पर भी निशाना साधते हुए सवाल किया कि सुधारों का मकसद क्या है? सुधार किसके लिए किए जा रहे हैं? क्या हमारा मकसद विशेषज्ञों के समूह को प्रभावित करना और बौद्धिक विमर्श में वाहवाही लूटना है? प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की "सबका साथ, सबका विकास" नीति दोहराते हुए कहा कि सुधारों का मतलब सभी नागरिकों खासकर गरीबों का जीवन बेहतर होने से है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुधारों के संबंध में हमारे विचार व्यापक होने चाहिए। इसलिए सुधारों का मकसद आर्थिक अखबारों में बेहतर सुर्खियां पाना नहीं बल्कि गरीबों के जीवन को बेहतर बनाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने 17 महीने देश की बागडोर संभाली तब की तुलना में अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहतर हुई है। विकास दर बढ़ी है, महंगाई घटी है। विदेशी निवेश बढ़ा है, चालू खाते का घाटा कम है। राजस्व बढ़ा है ब्याज दरें नीचे आई हैं। राजकोषीय घाटा कम हुआ है और रुपया स्थिर है। पीएम ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार सुविचारित नीतियों का परिणाम है।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने जिन सुधारों की शुरुआत की, वह देश के बदलाव के लिए है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग बनाया गया है। साथ ही सहयोगात्मक संघवाद की नीति पर अमल से अब राज्य सरकारें केंद्र के साथ मिलकर नीतियां और कार्यक्रम बना रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जन धन योजना के तहत लगभग 19 करोड़ बैंक खाते खुले हैं और इनमें करीब 26000 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। इसी तरह मुद्रा योजना के तहत अब तक 38,000 करोड़ रुपये लोन दिया जा चुका है। इससे 1.2 करोड़ नौकरियों के सृजन का आधार रखा है। दिल्ली आर्थिक कन्क्लेव का आयोजन वित्त मंत्रालय करता है। इस बार इसका विषय जेएएम- जन धन, आधार और मोबाइल पर रखा गया है।
इस मौके पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि उच्च विकास दर हासिल करके ही गरीबी मिटाई जा सकती है। जेटली ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी खराब स्थिति में है लेकिन भारत अब भी सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। भारत इससे कुछ संतुष्ट हो सकता है लेकिन असली मकसद इसकी क्षमता बढ़ाने और तेज विकास दर हासिल करने की है। उन्होंने कहा कि विकास दर तेज होने से गरीबी दूर की जा सकेगी।
उधर, देश में बढ़ती असहिष्णुता पर जारी बहस के बीच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कुछ हिंसक अतिवादी समूहों द्वारा विचारों की स्वतंत्रता के अधिकार के खुले उल्लंघन की निंदा की और इस बात से सहमति जतायी कि यह राष्ट्र पर आघात है। पूर्व प्रधानमंत्री शुक्रवार को ‘नेहरू की विरासत का संरक्षण और भारत का भविष्य’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
श्री मोदी ने कहा कि हमने जब 17 महीने पहले सत्ता संभाली थी उसके मुकाबले भारत बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर बढ़ी है और मुद्रास्फीति घटी है, विदेशी निवेश बढ़ा है और चालू खाते का घाटा कम हुआ है, राजस्व बढ़ा है, राजकोषीय घाटा कम हुआ है और रुपया स्थिर हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आर्थिक सुधारों का लक्ष्य अखबारों की सुर्खियां बटोरना नहीं बल्कि गरीबों का जीवन बेहतर बनाना है। प्रधानमंत्री ने युवाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि उनका मकसद भारत को नौकरी सृजित करने वाला देश बनाना है।
इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार ने थोड़े समय में ही मुद्रा योजना से एक करोड़ 20 लाख नौकरियों की बुनियाद रख दी है। सत्रह महीने में अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार की बात कहते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेश में जमा काले धन और कर चोरी के खिलाफ सरकार की मुहिम के परिणामस्वरूप अब तक 10,500 करोड़ रुपये काला धन पकड़ा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने छठे दिल्ली आर्थिक कान्क्लेव के उद्घाटन बाद अपने भाषण में बुद्धिजीवियों पर भी निशाना साधते हुए सवाल किया कि सुधारों का मकसद क्या है? सुधार किसके लिए किए जा रहे हैं? क्या हमारा मकसद विशेषज्ञों के समूह को प्रभावित करना और बौद्धिक विमर्श में वाहवाही लूटना है? प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की "सबका साथ, सबका विकास" नीति दोहराते हुए कहा कि सुधारों का मतलब सभी नागरिकों खासकर गरीबों का जीवन बेहतर होने से है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुधारों के संबंध में हमारे विचार व्यापक होने चाहिए। इसलिए सुधारों का मकसद आर्थिक अखबारों में बेहतर सुर्खियां पाना नहीं बल्कि गरीबों के जीवन को बेहतर बनाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने 17 महीने देश की बागडोर संभाली तब की तुलना में अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहतर हुई है। विकास दर बढ़ी है, महंगाई घटी है। विदेशी निवेश बढ़ा है, चालू खाते का घाटा कम है। राजस्व बढ़ा है ब्याज दरें नीचे आई हैं। राजकोषीय घाटा कम हुआ है और रुपया स्थिर है। पीएम ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार सुविचारित नीतियों का परिणाम है।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने जिन सुधारों की शुरुआत की, वह देश के बदलाव के लिए है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग बनाया गया है। साथ ही सहयोगात्मक संघवाद की नीति पर अमल से अब राज्य सरकारें केंद्र के साथ मिलकर नीतियां और कार्यक्रम बना रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जन धन योजना के तहत लगभग 19 करोड़ बैंक खाते खुले हैं और इनमें करीब 26000 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। इसी तरह मुद्रा योजना के तहत अब तक 38,000 करोड़ रुपये लोन दिया जा चुका है। इससे 1.2 करोड़ नौकरियों के सृजन का आधार रखा है। दिल्ली आर्थिक कन्क्लेव का आयोजन वित्त मंत्रालय करता है। इस बार इसका विषय जेएएम- जन धन, आधार और मोबाइल पर रखा गया है।
इस मौके पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि उच्च विकास दर हासिल करके ही गरीबी मिटाई जा सकती है। जेटली ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी खराब स्थिति में है लेकिन भारत अब भी सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। भारत इससे कुछ संतुष्ट हो सकता है लेकिन असली मकसद इसकी क्षमता बढ़ाने और तेज विकास दर हासिल करने की है। उन्होंने कहा कि विकास दर तेज होने से गरीबी दूर की जा सकेगी।


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